2 Line Shayari, Wo kitab lautane ka bahana

वो किताब लौटाने का बहाना तो लाखों में था,
लोग ढुँढते रहें सबूत पैग़ाम तो आँखों मे था।


बड़े सयाने कह गए ना गुलामी करो नार की,
बेटे जब अर्थी प जाओगे, ओड़े भी थामने जरुरत पड़ेगी एक यार की।


निगाहें नाज करती है फलक के आशियाने से..
खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।


ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की..
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था.. तो मोहब्बत कैसे ना होती।


इतने भी कीमती न थे तुम,
जितनी तुम्हारी कीमत चुकाई मैंने।


दिलो जान से करेंगे हिफ़ाज़त उसकी,साहब
बस एक बार वो कह दे कि मैं अमानत हूं तेरी अब में।


फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला
देखिये आपने ने फिर प्यार से देखा मुझको।


मैने सब कुछ पाया बस तुझको पाना बाकी है..
यु तो मेरे घर मे कुछ कमी नही है, बस तेरा आना बाकी है।


सुनो आज आखिरी बार अपनी बाहों मे सुला लो..
अगर आंख खुले तो उठा देना वरना सुबह दफना देना।


कोशिश इतनी है कोई रूठे ना हमसे,
नजर अंदाज करने वालो से नजर, हम भी नही मिलाते।

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