2 Line Shayari, Shaam hote hi parinde

शाम होतीं हैं परिन्दे घर को आते हैं..
और हम तो दिवानें हैं, तेरे ख्यालों में खो जाते हैं।


मैं नींद का शौक़ीन ज्यादा तो नहीं,
लेकिन कुछ खवाब ना देखूं तो गुज़ारा नहीं होता।


ना जाने.. करीब आना किसे कहते है,
मुझे तो.. आपसे दूर जाना ही नही आता।


इश्क़ वो नहीं जो तुझे मेरा कर दे,
इश्क़ वो है जो तुझे किसी और का ना होने दे। 💞


तेरे साथ के आगे जन्नत कुछ भी नहीं,
और तेरे साथ के सिवा मेरी कोई मन्नत भी नही।


फासला रख के क्या हासिल कर लिया तुमने,
रहते तो आज भी तुम मेरे दिल में ही हो।


जिन्दगी की हर तपिश को मुस्कुरा कर झेलिए,
धूप कितनी भी हो समंदर सूखा नही करते।


नज़्मों-ग़ज़ल सी याद है हर इक बात तुम्हारी,
मेरी किताब में मेरा लिखा कुछ भी तो नहीं।


ज़िंदगी का मेरी, सिवाये सांसों के सबूत क्या है,
अजीयत ये है दिल की, कि इसका वजूद क्या है।


तुम आए हो ना, शब-ए-इंतज़ार गुज़री है,
तलाश में है सहर, बार बार गुज़री है।

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