2 Line Shayari, Koun Kehta hai Maa!

कौन कहता है माँ का कलेजा दुनिया में सबसे नरम है,
मैंने बेटियों की विदाई में अक्सर पिता को टूटते देखा है।


बेनूर सी लगती है तुमसे बिछड़ कर ये रातें,
चिराग तो जलते है मगर उजाला नही करते।


मिज़ाज़ अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,
किसी ने कुछ भी कहा, बस मुस्करा दिया हमने।


कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब,
जो खुद ही कहे और खुद ही सुने।


शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो,
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं।


किस लिए, देखते हो तुम आईना,
तुम तो ख़ुद से भी, ज्यादा ख़ूबसूरत हो।


अभी काँच हूँ इसलिए सबको चुभता हूँ,
जिस दिन आइना बन जाऊँगा उस दिन पूरी दुनियाँ देखेगी।


ना खोल मेरे मकान के उदास दरवाज़े,
हवा का शोर मेरी उलझने बढ़ा देते है।


तहज़ीब में भी उसकी क्या ख़ूब अदा थी,
नमक भी अदा किया तो ज़ख़्मों पर छिड़क कर।


कसा हुआ हैं तीर हुस्न का, ज़रा संभलके रहियेगा,
नज़र नज़र को मारेगी, तो क़ातिल हमें ना कहियेगा।

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