2 Line Shayari, Har rishte mein noor

हर रिश्ते मे सिर्फ नूर बरसेगा..
शर्त बस इतनी है कि रिश्ते में शरारतें करो साजिशें नहीं।


मोहब्बत अब समझदार हो गयी है
हैसियत देख कर आगे बढ़ती है।


आराम से कट रही थी तो अच्छी थी जिंदगी
तू कहाँ इन आँखों की बातों में आ गयी।


हीरों की बस्ती में हमने कांच ही कांच बटोरे हैं
कितने लिखे फ़साने फिर भी सारे कागज़ कोरे है।


दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं
बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं।


सज़ा मिली है इसे, इसकी वफाओं के लिये!
दिल वो मुज़रिम है के, जिस पर कोई इल्ज़ाम नहीं!


मेरे मुन्सिफ को मगर, ये भी तो मंज़ूर न था!
दिल ने इन्साफ ही माँगा था, कुछ ईनाम नहीं!


खुशबु आ रही है कहीं से ताज़े गुलाब की
शायद खिड़की खुली रेह गई होगी उनके मकान की।


तेरी मोहब्बत की तलब थी इस लिए हाथ फैला दिए
वरना हमने तो कभी अपनी ज़िंदगी की दुआ भी नही माँगी।


बेगुनाह कोई नहीं, सबके राज़ होते हैं..
किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते हैं..।

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