2 Line Shayari, Aaj dhundh bahut hai

आज धुन्ध बहुत है मेरे शहर में,
अपने दिखते नहीं और जो दिखते है वो अपने नहीं।


कहो तो थोड़ा वक्त भेज दूँ,
सुना है तुम्हें फुर्सत नहीं मुझसे मिलने की।


हम कुछ ना कह सके उनसे, इतने जज्बातों के बाद..
हम अजनबी के अजनबी ही रहे इतनी मुलाकातो के बाद।


जो लम्हा साथ हैं उसे जी भर के जी लेना
कम्बख्त ये जिंदगी भरोसे के काबिल नहीं है।


मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ..
ऐ खुदा किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे जो मौत तक वफा करे


खामोश बैठें तो वो कहते हैं उदासी अच्छी नहीं..
ज़रा सा हँस लें तो मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं।


गिरते हुए आँसुओं को कौन देखता है..
झूठी मुस्कान के दीवाने हैं सब यहाँ।


इंसान बुलबुला है पानी का जी रहे हैं कपडे बदल बदल कर..
एक दिन एक ‘कपडे’ में ले जायेंगे कंधे बदल बदल कर।


तमाम गिले-शिकवे भुला कर सोया करो यारो..
सुना है मौत किसी को मुलाक़ात का मौका नही देती।


एक रास्ता ये भी है मंजिलों को पाने का..
कि सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलाने का।

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