2 Line Shayari #214, Mohabbat ka sabak

मुहब्बत का सबक बारिश से सीखो,
जो फूलो के साथ काँटो पर भी बरसती है।

जिंदगी अजनबी मोड़ पर ले आई है,
तुम चुप हो मुझ से और मैँ चुप हूँ सबसे। 😔

तेरा इश्क़ ऐसा जैसे बंधन पाँव का,
मेरा इश्क़ ऐसा जैसे संबंध छाँव का।

क्या खूब होता अगर दुख रेत के होते,
मुठ्ठी से गिरा देते पैरो से उड़ा देते।

नहीं मांगता ऐ खुदा कि जिंदगी सौ साल की दे,
दे भले चंद लम्हों की लेकिन कमाल की दे।

आए हैं वो मरीज़-ए-मोहब्बत को देख कर,
आँसू बता रहे हैं कोई और बात हो गयी। 😔

थोड़े और की आरजू तो मरते दम तक रहेगी,
चंद ख्वाइशों से पूरी कहां होगी हसरत।

इश्क़ के तोहफ़े तुम क्या जानो सनम,
तुमने तो इश्क़ भी ऐसे किया जैसे खरीदा हो।

सूरज की किरणों से मिट्टी भी सुनहरी हो जाती है
सोहबते सचमुच कमाल करती हैं

तुम्हारा ख्याल भी एक महक की तरह है,
एक बार आ जाए, तो पूरा दिन मेरे ज़हन में रहता है 💖

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