Love Shayari, Nikala karo idher se

निकला करो इधर से भी होकर कभी कभी;
आया करो हमारे भी घर पर कभी कभी;
माना कि रूठ जाना यूँ आदत है आप की;
लगते मगर हैं अच्छे आपके ये तेवर कभी कभी।

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