Hindi Shayari, Kal k nosikhya

कल के नौसखिए..सिकंदर हो गए..!
हल्की हवा के झोंके..बवंडर हो गए..!
मै लड़ता रहा..उसूलों की पतवार थामें..!
मै कतरा ही रहा..लोग समन्दर हो गए..!

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