Hindi Shayari, Din kuch aise Guzarta hai koi

दिन कुछ ऐसे
दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई,
जैसे ऐहसान उतारता है कोई,
आईना देखकर तसल्ली हुई,
हमको इस घर मे जानता है कोई,
पक गया है सजर मे फल शायद,
फिर से पत्थर उछालता है कोई,
दूर तक गूंजते है सन्नाटे,
जैसे हमको पुकारता है कोई!

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