2 line Shayari, Manjar bhi be noor the

मंजर भी बेनूर थे और फिजायें भी बेरंग थी..
बस तुम याद आए और मौसम सुहाना हो गया।


फितरत, सोच और हालात में फर्क है..
वरना, इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता।


गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल.
ये प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नही।


तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में,
बस कोई अपना नजऱ अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता।


तना पानी है तेरे पास ऐ बादल,
ये प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नही।


मंजर भी बेनूर थे और फिजायें भी बेरंग थी..
बस तुम याद आए और मौसम सुहाना हो गया।


आजकल के हर आशिक की अब तो यही कहानी है..
मजनू चाहता है लैला को, लैला किसी और की दीवानी है।


मोहब्बत वक़्त के बे-रहम तूफान से नही डरती ,
उससे कहना, बिछड़ने से मोहब्बत तो नही मरती।


जिंदगी के रूप में दो घूंट मिले,
इक तेरे इश्क का पी चुके हैं.. दुसरा तेरी जुदाई का पी रहे हैं।


मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमे,
छोड़ गया वो ये सोच कर की हम जुदाई मे भी खुश हैं।

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