Hindi Poems Poetry

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Life Shayari, Rui ka gadda bech kar Maine ek dari

सुकून-ए-ज़िंदगी

रुई का गद्दा बेच कर.. मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने और ख़ुशी खरीद ली..

सबने ख़रीदा सोना..मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी डोरी ख़रीद ली..

मेरी एक खवाहिश मुझसे मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली..

इस ज़माने से सौदा कर.. एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और शामें खरीद ली..

शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से और कुछ कम किये,
फ़िर सस्ते में ही “सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली!
💕💕

Hindi Potery, Kuchh dabi hui khvaahishen hai

इसी का नाम ज़िन्दगी है
कुछ दबी हुई ख़्वाहिशें है, कुछ मंद मुस्कुराहटें..
कुछ खोए हुए सपने है, कुछ अनसुनी आहटें..
कुछ सुकून भरी यादें हैं, कुछ दर्द भरे लम्हात..
कुछ थमें हुए तूफ़ाँ हैं, कुछ मद्धम सी बरसात..
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं, कुछ नासमझ इशारे..
कुछ ऐसे मंझधार हैं, जिनके मिलते नहीं किनारे..
कुछ उलझनें है राहों में, कुछ कोशिशें बेहिसाब..
बस इसी का नाम ज़िन्दगी है चलते रहिये, जनाब..!!

Sad Shayari, Aankhon se aankhe mila gaya koi

आंखों से आँखे
आंखों से आँखे मिला गया कोई,,
दिल की कलियाँ खिला गया कोई..
दिल की धड़कन यूँ बेताब न थी,,
मुझको दीवाना बना गया कोई..
जो बात उसे कहनी ना थी,,
हाले दिल अपना सुना गया कोई..
सूने मन के इस आंगन में,,
आस मिलन की जगा गया कोई..
रहता हूँ मैं कुछ खोया खोया सा,,
जाने क्यूँ मुझको रुला गया कोई..!!

Sad Shayari, kisi ka gam apna banane ko jee karta hai

आज फिर
किसी का गम, अपना बनाने को जी करता है,
किसी को दिल में, बिठाने को जी करता है,
आज दिल को क्या हुआ, खुदा जाने,
बुझती हुई शमा, फिर जलाने को जी करता है,
आफतों ने, जर्जर कर दिया घर मेरा,
उसकी दरोदीवार, फिर सजाने को जी करता है,
एक मुद्दत गुज़री, जिसका साथ छूटा,
आज फिर, उसका साथ पाने को जी करता है!
💕💕

Kabhi nind aati thi, aaj sone ko mann nahi karta

मन नही करता
कभी नींद आती थी..
आज सोने को “मन” नही करता,
कभी छोटी सी बात पर आंसू बह जाते थे..
आज रोने तक का “मन” नही करता,
जी करता था लूटा दूं खुद को या लुटजाऊ खुद पे..
आज तो खोने को भी “मन” नही करता,
पहले शब्द कम पड़ जाते थे बोलने को..
लेकिन आज मुह खोलने को “मन” नही करता,
कभी कड़वी याद मीठे सच याद आते हैं..
आज सोचने तक को “मन” नही करता,
मैं कैसा था? और कैसा हो गया हूं..
लेकिन आज तो यह भी सोचने को “मन” नही करता। 📕✍

Zara si zindagi mein vyavdhaan bahut hain

ज़रा सी ज़िन्दगी
ज़रा सी ज़िन्दगी में, व्यवधान बहुत हैं,
तमाशा देखने को यहां, इंसान बहुत हैं!
कोई भी नहीं बताता, ठीक रास्ता यहां,
अजीब से इस शहर में, ‘नादान’ बहुत हैं!
न करना भरोसा भूल कर भी किसी पे,
यहां हर गली में साहब बेईमान बहुत हैं!
दौड़ते फिरते हैं, न जाने क्या पाने को,
लगे रहते हैं जुगाड में, परेशान बहुत है!
खुद ही बनाते हैं हम, पेचीदा ज़िन्दगी को,
वर्ना तो जीने के नुस्खे, आसान बहुत हैं! 📕 ✍

Mujhko Ckhu ke pighal rahe ho tum, Poetry

मुझको छूके
मुझको छूके पिघल रहे हो तुम ,
मेरे हमराह जल रहे हो तुम।
चाँदनी छन रही है बादल से ,
जैसे कपड़े बदल रहे हो तुम।
पायलें बज रही हैं रह रह कर ,
ये हवा है कि चल रहे हो तुम।
नींद भी टूटने से डरती है ,
मेरे ख़्वाबों में ढल रहे हो तुम। 💏