हिंदी में एटीट्यूड शायरी, जहाँ कदर न हो

ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम,
तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हैं हम।
Ye mat samajh ki tere kabil nahi hain hum,
Tadap rahe hain vo jise haasil nahin hain ham.

हिंदी में एटीट्यूड शायरी, वो खुद पर इतना गुरूर करते हैं

हिंदी में एटीट्यूड शायरी, वो खुद पर इतना गुरूर करते हैं

वो खुद पर इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।
Woh Khud Par Guroor Karte Hai,
To Isme Hairat Ki Koi Baat Nahi.
Jinhe Hum Chahte Hai,
Woh Aam Ho Hi Nahi Sakte.

जहाँ कदर न हो अपनी वहाँ जाना फ़िज़ूल है,
चाहे किसी का घर हो चाहे किसी का दिल।
Jaha kadar na ho apni Waha jana fizool hai,
Chahe kisi ka ghar ho chahe kisi ka dil.

पीने पिलाने की क्या बात करते हो,
कभी हम भी पिया करते थे,
जितनी तुम जाम में लिए बैठे हो,
उतनी हम पैमाने में छोड़ दिया करते थे।
Pine Pilaane Ki Kya Baat Karte Ho,
Kabhi Hum Bhi Piya Karte The,
Jitni Tum Jaam Me Liye Bethe Ho,
Utni Hum Paimaane Me Chhod Diya Karte The.

मत पढ़ा करो मेरी शायरी को इतना गौर से,
कभी कुछ याद रह गया तो भूल नहीं पाओगे।
Mat padha karo meri shayari ko itna gaur se,
kabhi kuchh yaad rah gaya to bhool nahi paoge.

मैं वही हूँ जो कहता था कि,
इश्क में क्या रखा है पर,
आजकल एक पगली की मोहब्बत ने,
मुझे पागल बना रखा है।
ein Wahi Hun Jo Kehta Tha Ki
Ishq Me Kya Rakha Hai Par
Aajkal Ek Pagli Ki Muhobbat Ne
Mujhe Pagal Bana Rakha Hai…

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