2 Line Shayari, Wo Katra Katra Mujhe

वो कतरा-कतरा मुझे तबाह करते गये,
हम रेशा-रेशा उनपे निसार होते गए।


बदल जाती है ज़िंदगी की हक़ीक़त,
जब तुम मुस्कुराकर कहते हो तुम बहुत प्यारे हो।


सुनो! मुख़्तलिफ़ है इश्क़ का गणित,
यहाँ तुम और मैं – दो नहीं एक होते हैं।


मीठी सी खुशबू में रहते है गुमसुम,
अपने अहसास से बाँट लू तंहाई तेरी।


मइय्यत पे मेरी आए हैं कुछ इस अदा से वो,
सब उन पे मर मिटे हैं मुझे तन्हा छोड़ के।


संग उनके हम दो पल बीताना चाहते हैं,
जो हमारे न हो कर भी.. हमारे है।


गठरी भर यादों के अलावा..
हैं ही क्या मेरे पास वसिहतें मोहब्बत में।


मुश्कीलो से कह दो उलझा ना करे हम से,
हमे हर हालात में.. जीने का हूनर आता है।


एक हसरत-ऐ-दिल है की कभी वो भी हमे मनायें,
पर ये दिल-ऐ-कमबख्त कभी उनसे रुठा ही तो नही।


इतना दर्द तो खुदा ने भी नहीं ₹लिखा होगा,
मेरी क़िस्मत में, जितना दर्द तूने मुझे प्यार कर के दिया है।