2 Line Shayari, Unse mohabbat aur

उससे मोहब्बत और भी बढ़ गयी,
जबसे पता चला है कि हमारा साथ हमेशा नहीं रहेगा।


इबादतखानो में क्या ढूंढते हो मुझे,
मैं वहाँ भी हूँ, जहाँ तुम गुनाह करते हो।


ये कभी मत कहना की वक्त मेरी मुठ्ठी में कैद है,
मैंने बरसों की मोहब्बत को पल में टूटते देखा है।


कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है,
सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है।


अगर रातों को जागने से होती ग़मों में कमी,
तो मेरे दामन में खुशियों के सिवा कुछ नहीं होता।


अंदर.. कोई झांके तो टुकड़ो में मिलेंगे,
यह हंसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है।


मेरी तक़दीर संवर जाती उजालों की तरह,
आप मुझे चाहते अगर चाहने वालों की तरह।


साँसे तो हम.. बस दिखाने के लिए लेते हैं,
वरना ज़िन्दगी तो.. हमारी तुम ही हो।


मैं याद तो हूँ उसे पर ज़रूरत के हिसाब से,
लगता है मेरी हैसियत भी कुछ नमक जैसी है।


तोड़ेंगे गुरुर इश्क का और इस कदर सुधर जायेंगे,
खडी रहेगी मोहब्बत रास्ते पर हम सामने से गुजर जायेंगे।