2 Line Shayari, Parwah nahi chahe

परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो,
चलूँगा उसी राह पर जो सीधी और साफ हो।


मेरी आवाज को महफूज कर लो.. मेरे दोस्त
मेरे बाद बहुत सन्नाटा होगा.. तुम्हारी महफ़िल में।


कभी शाम होने के बाद.. मेरे दिल में आकर देखना,
खयालों की महफिल सजी होती है और जिक्र सिर्फ तुम्हारा होता है।


सवर रही है अब वो किसी और के लिए..
पर मैं बिखर रहा हूँ आज भी उसी के लिए।


शतरंज मे वज़ीर और ज़िंदगी मे ज़मीर,
अगर मर जाए तो समझिए खेल ख़त्म।


मोहब्बत और मुकद्दर में बरसों से जिद का रिश्ता है,
मोहब्बत जब भी होती है तो मुकद्दर रूठ ही जाता है।


आसानी से जो कोई मिल जाए तो वो किस्मत की बात है,
सूली पर चढ़कर भी जो ना मिले उसे मोहब्बत कहते है!!


हम तो पागल है जो शायरी में ही दिल की बात कह देते है..
लोग तो गीता पे हाथ रखके भी सच नहीं बोलते।


तेरा नाम लूँ जुबां से तेरे आगे ये सिर झुका दूँ,
मेरा इश्क़ कह रहा है, मैं तुझे खुदा बना दूँ।


हश्र-ऐ-मोहब्बत और अंजाम अब ख़ुदा जाने
तुझ से मिलकर मिट जाना ही मेरा वजूद था।

2 Line Shayari, Parwah nahi chahe