2 Line Shayari, Julm Ke Sare Hunar

जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये,
जुल्म भी सहा हमने.. और जालिम भी कहलाये गये।


ज़ख्म कहां कहां से मिले है, छोड़ इन बातो को,
ज़िन्दगी तु तो ये बता, सफर कितना बाकी है।


यादे अपनी साथ ले जाओ मुझ को क्यो तड़पाती है,
मेरे ख्याल मेरे नस नस मे इस तरह कब्जा जमाती है।


पहले तुम.. अब यादें तुम्हारी,
दुश्मनी क्या है.. मुझसे तुम्हारी। 💖


आज फिर कोई दिल को इस कदर सता रहा है,
आज फिर कोई दूर जाने का इशारा करके पास बुला रहा है।


चाहत थी या, दिल्लगी या, यूँ ही मन भरमाया था,
याद करोगे तुम भी कभी, किससे दिल लगाया था! 💞


क्या बताऊं यार तुझको.. प्यार मेरा कैसा है,
चांद सा नही है वो.. चांद उसके जैसा है। 💝


तलब ये है कि मैं सर रखूँ तेरे सीने पे..
और.. तमन्ना ये कि मेरा नाम पुकारती हों धड़कनें तेरी।


काश कोई इस तरह भी वाकिफ हो मेरी जिंदगी से,
कि में बारिश में भी रोऊँ और वो मेरे आंसू पढ़ ले।


चल चलें किसी ऐसी जगह जहाँ कोई न तेरा हो न मेरा हो,
इश्क़ की रात हो और.. बस मोहब्बत का सवेरा हो..!! 💟