2 Line Shayari, Dard ki bhi apni alag adaa hai

दर्द की भी अपनी अलग अदा है
वो भी सहने वालो पर फ़िदा है


गुज़र जायेगी कुछ इस तरह बसर करके
तेरी हसरतों के साथ रह-गुज़र करके।


दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता, क्यों जाते मैख़ाने लोग ।
अब जब मुझ को होश नहीं है, आये हैं समझाने लोग ।।


जो नज़रें रूकती नहीं ढूढंते हुए मंज़िल-ए-अहम
उन नज़रों की गिरफ़्त में एक ज़माना आज भी क़ैद हैं।


सारी बस्ती कदमों में है ये भी एक फनकारी है वरना…
बदन को छोड़के अपना जो कुछ है सरकारी है।


कभी प्यार करने का दिल करे तो ग़मों से करना..
सुना है, जिसे जितने प्यार करो वो उतना दूर चला जाता है।


क्या दुआ करु मेरे दोस्तों के लिए ऐ खुदा…
बस यही दुआ है कि, मेरे दोस्त कभी किसी दुआ के मोहताज न हो।


खुशमिजाजी मशहूर है हमारी,सादगी भी कमाल है ..
हम शरारती भी इंतेहा के है, तन्हा भी बेमिसाल हैं।


मेरी हर सांस को महका गया तू कैसे शुक्रिया
अदा करू तेरा…इस नाचीज को इश्क करना सिखा गया तु।


Nikal parte hain aansu jab tumhaari yaad aati hai..
Yeh woh barsaat hai jiska koi mausam nahin hota.

2 Line Shayari, Dard ki bhi apni alag adaa hai