2 Line Shayari #198, Mein Waqt ban jaau

मैं वक़्त बन जाऊं तू बन जाना कोई लम्हा,
मैं तुझमें गुजर जाऊं तू मुझमें गुजर जाना।

ठुकरा दो अगर दे कोई जिल्लत से समंदर,
इज्जत से जो मिल जाए वो कतरा ही बहुत है।

सुना था वख्त बदलता रहता है,
और अब वख्त ने बताया की लोग भी बदलते है।

तुम्हारी आँखों में बसा है आशियाना मेरा,
अगर ज़िन्दा रखना चाहो तो कभी आँसू मत लाना।

शायरी करने के लिए कुछ खास नहीं चाहिए..
एक यार चाहिए वो भी दगाबाज चाहिए..!!🌹

में नादाँ था वफ़ा तलाश करता रहा ग़ालिब,
भूल गया कि सास भी एक दिन बेवफा हो जाएंगी।

मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है,
वो लोग जो मोहब्बत की धूप में जले होते है।

चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही,
लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं।

हम तो जोङना जानते हैं.. तोङना तो सिखा ही नहीं,
खुद टूट जाते हैं अक्सर.. किसी को छोङना सिखा ही नहीं।

जुल्फों को हटा दे चेहरे से थोडासा उजाला होने दो,
सूरज को जरा शरमिंदा कर, वो रात सा काला होने दो। 🌺

2 Line Shayari #198, Mein Waqt ban jaau