Hindi Poetry, Tut jajaye na bharam

टूट जाये ना

टूट जाये ना भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाली..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
दिल मे प्यार होता तो तेरे दर पे हाथ फैलाता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाती है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे।

~ Dev Patel

Hindi Poetry, Dil pe aaye huye

दिल पे

दिल पे आये हुए इलज़ाम पहचानते है,
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते है..

आईना-दार-ए-मोहब्बत हूँ कि अरबाब-ए-वफ़ा,
अपने ग़म को मेरे अंजाम से पहचानते है..

वादा हो शाम का कभी इक वजह-ए-मुलाक़ात सही,
हम तुझे गर्दिश-ए-अय्याम से पहचानते है..

पाँव फटे क्यूँ मेरी पलकों से सजाते हो इन्हे
ये सितारे तो मुझे शाम से पहचानते है।

~ देव पटेल

Hindi Poetry, Sahar ke khwab se

सहर के ख़्वाब से आँखें खुलीं जो रात मेरी,
कटी पतंग, नज़र आयी मुझको जात मेरी..

दुखों ने नन्हीं -सी जाँ को कुछ ऐसा घेरा है,
उलझ गई है मसाइब (आपत्ति) में काइनात मेरी..

वो मेरे हाले-ज़ुबों से भी प्यार करता है,
ठहर गई हैं मेरी खामेयाँ (अवगुण) सिफात (गुण) मेरी..

मेरा ही हाल न उसके बगैर बिगड़ेगा,
बहुत रुलाएँगी उसको भी बात-बात मेरी..

तलाशे-रिज़्क ने जमने दिये न पाँव कभी,
ख़ते – ग़ुबार बनी जा रही है जात मेरी..

नये दरख़्तों ने महफूज कर लिया है मुझे,
कि दास्तानें हैं तहरीर पात-पात मेरी..

ज़मीं पे रह के भी मेहदी (Name) मैं अर्श-पैमा हूँ,
बिसाते-वक़्त पे मुमकिन नहीं है मात मेरी।

– शौकत मेहदी

Hindi Poetry, Itna batla ke

इतना बतला

इतना बतला के मुझे हरजाई हूँ मैं यार कि तू,
मैं हर इक शख्स से रखता हूँ सरोकार के तू..

कम-सबाती मेरी हरदम है मुखातिब ब-हबाब,
देखें तो पहले हम उस बहर से हों पार के तू..

ना-तवानी मेरी गुलशन में ये ही बहसें है,
देखें ऐ निकहत-ए-गुल हम हैं सुबुक-बार के तू..

दोस्ती कर के जो दुश्मन हुआ तू जुरअत का,
बे-वफा वो है फिर ऐ शोख सितम-गार के तू।

– क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’

Hindi Poetry, Unse Door Rehne ka

उस ने दूर

उस ने दूर रहने का मशवरा भी लिखा है,
साथ ही मुहब्बत का वास्ता भी लिखा है,

उस ने ये भी लिखा है मेरे घर नहीं आना,
साफ़ साफ़ लफ़्ज़ों में रास्ता भी लिखा है,

कुछ हरूफ लिखे हैं ज़ब्त की नसीहत में,
कुछ हरूफ में उस ने हौसला भी लिखा है,

शुक्रिया भी लिखा है दिल से याद करने का,
दिल से दिल का है कितना फ़ासला भी लिखा है,

क्या उसे लिखें मोहसिन क्या उसे कहें मोहसिन,
जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है।

– मोहसिन नक़वी

Hindi Poetry, Jaagti Aankho hi se

जागती आँखों ही से सोती रहती हूँ,
मैं पलकों में खाव्ब पिरोती रहती हूँ..

तेजाबी बारिश के नक्श नहीं मिटते,
मैं अश्कों से आँगन धोती रहती हूँ..

मैं खुशबू की कद्र नहीं जब कर पाती,
फूलों से शर्मिंदा होती रहती हूँ..

जब से गहराई के खतरे भांप लिए,
बस साहिल पर पाँव भिगोती रहती हूँ ..

मैं भी नुसरत उसके लम्स की गर्मी से,
कतरा कतरा दरिया होती रहती हूँ

– नुसरत मेंहदी

2 Line Shayari, Kisi ko pyar karo

किसी को प्यार करो तो इतना करो की..
बयां करने से पहले उसे भी तुमसे प्यार हो जाए।


मैं, मेरी तन्हाई, मेरा दर्द और तेरी यादें,
हर रात एक ही तकिये पर सोते हैं इकट्ठे होकर।


नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं,
जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं।


इत्तफ़ाक़ से नहीं मिले हम सब एक दूसरे से,
इस में थोड़ी बहुत साज़िश तो खुदा की भी रही होगी।


टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर,
चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में।


अगर पता होता कि इतना तड़पाती है महोब्बत,
तो कसम से दिल लगाने से पहले हाथ जोड़ लेते।


किस्मत के तराज़ू में तोलो,तो फ़कीर हैं हम,
और दर्द-ए-दिल में, हम सा नवाब कोई नहीं।


दिल अधूरी सी कहानियों का अंत ढूंढता रहा,
और वो कोरा पन्ना मुझे देर तक घूरता रहा।


तुझे बर्बाद कर दूंगी, अभी भी लौट जा वापिस,
मोहब्बत नाम है मेरा, मुझे कातिल भी कहते हैं।


हाल मेरा भी दिन रात कुछ ऐसा है इन दिनों,
वो ज़िन्दगी में आते भी नहीं और ख्यालों से जाते भी नहीं।

2 Line Shayari, Kanch sa tha to

काँच सा था तो हमेशा तोड़ देते थे मुझे,
अब तोड़ के दिखाओ कि अब पत्थर सा हूँ मैं।


नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो,
मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो।


इश्क था इश्क, भला कैसे गवारा करते,
ये कोई निकाह नही जो दोबारा करते।


लो इबादत रखा अपने रिश्ते का नाम,
यारा, मुहब्बत को तो लोगों ने बदनाम कर दिया है।


​अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में,
​फकत यूं ही दिल लगाने से, दिलो में घर नहीं बनते​।


तुझमें हमेशा खुदा का अक्स देखा है मैंने,
मेरा इश्क़ तो कब का मुकम्मल हो गया।


मेरी फितरत में नहीं है किसी से नाराज होना,
नाराज वो होते है जिसे खुद पर गुरुर होता है।


आँखों को इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया,
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया।


सारी दुनिया के रूठ जाने की परवाह नहीं मुझे,
बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है।


तेरी मोहब्बत की बाजी को यारा हम मान गए,
खुद तो वादों से बंधे नही हमे ही यादों से बांध गए।

2 Line Shayari, Waqt ne kaha

वक़्त ने कहा, काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा, काश थोड़ा और वक़्त होता।


जिस्म से रूह तक जाए तो हकीकत है इश्क,
और रूह से रूह तक जाए तो इबादत है इश्क़।


शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का,
मगर क्या करूँ अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का।


वापस लौट आया है हवाओं का रुख मोड़ने वाला,
दिल में फिर उतर रहा है दिल तोड़ने वाला।


रहने लगा है ऐसा ही मेरा हाल अक्सर,
अब आँखों से बह जाते हैं ख्याल अक्सर।


तमन्ना मचल रही है थोड़ा सा साथ दे दो,
बदले में ले लो सांसे मुझे अपना हाथ दे दो।


मौहब्बत कोई तस्वीर नहीं जनाब जो देख लोगे,
एक एहसास है जो चुपके से दिल में दस्तक देता है।


शायरी नहीं, यह लफज़ो में लिपटे मखमली..
अहसास हैं हमारे सिर्फ उनके लिए जो बेहद खास हैं हमारे।


जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज चलती है साहब,
एक दिन कुछ ना लिखो तो लोग भुलने लगते हैं।


मै तो फना हो गया उसकी एक झलक देखकर,
ना जाने हर रोज़ आईने पर क्या गुजरती होगी।

Love Shayari, Husn ki ishq se

Husn ki ishq se jab jab baat hoti hai,
Mehfil mein unki baat se har baat hoti hai,
Wah kehte rahe koi baat nahin ham dono mein,
Par unki kahani se nai shuruat hoti hai.

हुस्न की इश्क से जब जब बात होती है,
महफिल में उनकी बात से हर बात होती है,
वह कहते रहे कोई बात नहीं हम दोनों में,
पर उनकी कहानी से नई शुरूआत होती है।