2 Line Shayari, Nazron se Door

नज़रों से दूर सही दिल के बहुत पास है तू..
बिखरी हुई इस ज़िन्दगी में मेरे जीने की आस है तू..


वो मेरी हर दुआ में शामिल था
जो किसी और को बिन मांगे मिल गया


तुम थोड़ी सी ‪#‎फुलझड़ी‬ क्या हुई..
पूरा मौहल्ला ही ‪#‎माचिस‬ हो गया..


काश तुझे सर्दी के मौसम मे लगे मुहब्बत की ठंड,
और तू तड़प कर माँगे मुझे कम्बल की तरह..!


कहाँ ढूँढ़ते हो तुम इश्क़ को ऐ-बेखबर
ये खुद ही ढून्ढ लेता है जिसे बर्बाद करना हो ..


मैने कहा बडी तीखी‬ मिर्च होयार तुम..!!
वो.. मेरे होठचुम करबोलीऔर अब!!


Aaj Koi ‪‎Shayari‬ Nahi Bas Itna ‪Sun‬ Lo
Mei ‪Tanha‬ Hu aur ‪‎Wajah‬ Tum Ho…!!


Rehte Hain Aas-Paas Hi Lekin Saath Nahi Hote..
Kuch Log Jalte Hain Mujhse Bus Qaakh Nahi Hote!!


बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी,
अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है!


Udne de inn parindon ko ae dost,
jo tere honge laut hi aayenge kisi roz!

2 Line Shayari, Nazron se Door