2 Line Shayari, Mohabbat Na Sahi

मोहब्बत न सही मुकदमा कर दे मुज पर..
कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी।


मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो।


जिन के आंगन में अमीरी का शजर लगता है,
उन का हर एब भी जमानें को हुनर लगता है।


तजुर्बा कहता है मोहब्बत से किनारा कर लूँ,
और दिल कहता हैं की ये तज़ुर्बा दोबारा कर लू।


ये झूठ है के मुहब्बत किसी का दिल तोड़ती है,
लोग खुद ही टुट जाते है, मुहब्बत करते-करत।


ऊँची इमारतों से मकां मेरा घिर गया,
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए।


गर तेरी नज़र क़त्ल करने मे माहिर है तो सुन,
हम भी मर मर के जीने मे उस्ताद हो गए है।


दिल मेरा भी कम खूबसूरत तो न था,
मगर मरने वाले हर बार सूरत पे ही मरे।


किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर,
‘ईश्वर’ बैठा है, तू हिसाब ना कर।


ऐ दिल थोड़ी सी हिम्मत कर ना यार,
चल दोनों मिल कर उसे भूल जाते है।


मैं उसकी ज़िंदगी से चला जाऊं यह उसकी दुआ थी,
और उसकी हर दुआ पूरी हो, यह मेरी दुआ थी।


तुझे मुफ्त में जो मिल गए हम,
तु कदर ना करे ये तेरा हक़ बनता है।