2 Line Shayari, Khatkhatay na koi

खटखटाए न कोई दरवाजा, बाद मुद्दत मैं खुद में आया हूँ,
एक ही शख़्स मेरा अपना है, मैं उसी शख़्स से पराया हूँ।


देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम,
जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ तेरे हर मर्ज की दवा वही है।


ऐ दिल चल छोड अब ये पहरे,
ये दुनिया है झूठी यहाँ लोग हैं लुटेरे।


हुस्न वालों को क्या जरूरत है संवरने की,
वो तो सादगी में भी क़यामत की अदा रखते हैं।


तूने ही लगा दिया इलज़ाम-ए-बेवफाई,
मेरे पास तो चश्मदीद गवाह भी तु ही थी।


काश तेरा घर मेरे घर के बराबर होता,
तू न आती तेरी आवाज तो आती रहती।


कभी जो मुझे हक मिला अपनी तकदीर लिखने का..
कसम खुदा की तेरा नाम लिखुंगी और कलम तोड दुंगी।


मौजूद थी अभी उदासी रात की,
बहला ही था दिल ज़रा सा के फ़िर भोर आ गयी।


ख्वाहिश-ए-ज़िंदगी बस इतनी सी है अब मेरी,
कि साथ तेरा हो और ज़िंदगी कभी खत्म न हो।


करम ही करना है तुझको तो ये करम कर दे,
मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को कम कर दे।

2 Line Shayari, Khatkhatay na koi