2 Line Shayari, Jism uska bhi mitti ka hai

जिस्म उसका भी मिट्टी का है मेरी तरह ए खुदा
फिर क्यू सिर्फ मेरा ही दिल तडफता है उस के लिये।


चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी है तीर की तरह,
मगर ख़ामोश रहेता हूँ अपनी तक़दीर की तरह।


ऊपर वाले ने कितने लोगो की तक़दीर सवारी है,
काश वो एक बार मुझे भी कह दे के आज तेरी बारी है।


चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी है तीर की तरह,
मगर ख़ामोश रहेता हूँ अपनी तक़दीर की तरह।


झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम
ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम।


ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो दर्द की शिद्दत,
दर्द तो दर्द होता हैं थोड़ा क्या, ज्यादा क्या।


तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में,
बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता।


अच्छा लगता हैं तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
जैसे कोई खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, किसी हसीन शाम के साथ।


अपनी ईन नशीली निगाहों को जरा
झुका दीजिए जनाब, मेरे मजहब में नशा हराम है।


आज किसी की दुआ की कमी है, तभी तो हमारी आँखों में नमी है,
कोई तो है जो भूल गया हमें, पर हमारे दिल में उसकी जगह वही है।