2 Line Shayari, Garibo ka dard

गरीब का दर्द सुला दिया माँ ने..
ये कहकर, परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर।


तुम बदले तो मज़बूरिया थी,
हम बदले तो बेवफा हो गए।


अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का,
सुकून ढूढनें चले थे, नींद ही गवा बैठे।


तेरी याद से शुरू होती है मेरी हर सुबह,
फिर ये कैसे कह दूँ.. कि मेरा दिन खराब है।


बंद कर दिए है हमने दरवाज़ें “इश्क” के,
पर तेरी याद हे की “दरारों” मे से भी आ जाती हैं।


जिंदगी सफ़र पर निकल चुकी है,
मंजिल कब मिलेगी तू ही बता ये मेरे खुदा।


जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
बहुत तङपाते हैँ अक्सर सीने से लगाने वाले।


बहुत कुछ खरीदकर भी बहुत कुछ बचा लेता था,
आज के जमाने से तो, वो बचपन का जमाना अच्छा था।


बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर,
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया।


जिंदगी के पन्ने कोरे ही अच्छे थे,
तूने सपनों की स्याही बिखेर कर दाग दाग कर दिया।

2 Line Shayari, Garibo ka dard