Hindi Poems Poetry in Hindi

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Hindi Poetry, Agar Safar me

अगर सफ़र में

अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले,
तवाफ़ करता हुआ मौसमे-बहार चले।

नवाज़ना है तो फिर इस तरह नवाज़ मुझे,
कि मेरे बाद मेरा ज़िक्र बार-बार चले।

जिस्म क्या है, कोई पैरहन उधार का है,
यहीं संभाल के पहना, यहीं उतार चले।

यही तो इक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की,
जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले।

Hindi Poetry, In aankho me

इन आँखों में

इन आँखों में डूब कर मर जाऊं,
ये खूबसूरत मैं काम कर जाऊं,

तेरी आँखों की झील उफ़्फ़ तौबा,
इन गहराईओं में मैं अब उतर जाऊं,

तेरी आँखें हैं या मय के ये पैमाने हैं,
पी लूं और हद से मैं गुजर जाऊं,

एक शिकारा है जो तेरी आँखों में,
तू कहे अगर तो इनमें मैं ठहर जाऊं,

तेरी आँखों की झील सी गहराई में,
जी चाहता है मेरा आज मैं उतर जाऊं।

Hindi Poetry, Saari basti me

सारी बस्ती

सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको,
जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको,

सदियों का रत जगा मेरी रातों में आ गया,
मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया,

जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए,
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए,

गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर,
उड़ जाए दुपट्टा तो खनक औढ लिया कर,

तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं,

रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,
अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है।

~ क़तील शिफ़ाई

Hindi Poetry, Meri yaado ne

मेरी यादों ने

मेरी यादों ने तेरा शाना हिलाया होगा,
तुझको मेरी यादों ने ही यादों से जगाया होगा..

कौन उठाएगा तेरे नाज फुलों जैसे,
उसने ही मेरे लिये तुझको बनाया होगा..

पुरकैफ हवाऐं हैं, मौसम भी सुहाना है,
ऐसे में चले आओ, मिलने का जमाना है..

घर मेरे न आओगे मैं खुब समझता हूँ,
मेंहदी के लगाने का, सिर्फ एक बहाना है..

इन मस्त हवाओं में रंगीन फजाओं मे,
आ जाओ सनम तुमको, हमराज बनाना है..

मैखाने की बस्ती में क्यूँ आज चले आये?,
क्या हजरते वाईज को, कुछ पिना पिलाना है..

मैखाने में आये हैं ये सोच के हम साकी,
दुनिया में रफिक अपना, एक ये ही ठिकाना है।

– रफिक हुसैन

Hindi Poetry, Hamara Dil

हमारा दिल

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए
चराग़ों की तरह आँखें जलें, जब शाम हो जाए

मैं ख़ुद भी एहतियातन, उस गली से कम गुजरता हूँ
कोई मासूम क्यों मेरे लिए, बदनाम हो जाए

अजब हालात थे, यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर
मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाए

समन्दर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दो हमको
हवायें तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए

मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिंदा आस्माँ छूने में जब नाकाम हो जाए

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में, ज़िंदगी की शाम हो जाए

~ बशीर बद्र

Hindi Poetry, Chori kahi khule na

चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की,
ख़ुश-बू उड़ा के लाई है गेसू-ए-यार की,
अल्लाह रक्खे उस का सलामत ग़ुरूर-ए-हुस्न,
आँखों को जिस ने दी है सज़ा इंतिज़ार की,
गुलशन में देख कर मिरे मस्त-ए-शबाब को,
शरमाई जारी है जवानी बहार की,
ऐ मेरे दिल के चैन मिरे दिल की रौशनी,
आ और सुब्ह कर दे शब-ए-इंतिज़ार की,
जुरअत तो देखिएगा नसीम-ए-बहार की,
ये भी बलाएँ लेने लगी ज़ुल्फ़-ए-यार की,
ऐ ‘हश्र’ देखना तो ये है चौदहवीं का चाँद,
या आसमाँ के हाथ में तस्वीर यार की।

~ आग़ा हश्र काश्मीरी

Hindi Poetry, Sakht Dhoop me

सख्त़ धूप में

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया..

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया..

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया..

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया..

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया..

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया..

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल ‘फ़राज़’ तेरा हुनर हो गया।

~ फ़राज़

तराशा= Chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide,
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

Hindi Poetry, Machal ke jab bhi

मचल के जब

मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू,
सुना है आबशारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
खुदारा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को,
चरागों से मज़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है,
क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी,
मगर हम खाकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है।

~ गुलज़ार

Hindi Poetry, Tut jajaye na bharam

टूट जाये ना

टूट जाये ना भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाली..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
दिल मे प्यार होता तो तेरे दर पे हाथ फैलाता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाती है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे।

~ Dev Patel

Hindi Poetry, Dil pe aaye huye

दिल पे

दिल पे आये हुए इलज़ाम पहचानते है,
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते है..

आईना-दार-ए-मोहब्बत हूँ कि अरबाब-ए-वफ़ा,
अपने ग़म को मेरे अंजाम से पहचानते है..

वादा हो शाम का कभी इक वजह-ए-मुलाक़ात सही,
हम तुझे गर्दिश-ए-अय्याम से पहचानते है..

पाँव फटे क्यूँ मेरी पलकों से सजाते हो इन्हे
ये सितारे तो मुझे शाम से पहचानते है।

~ देव पटेल