Hindi Poems Poetry

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Hindi Poetry, Saari basti me

सारी बस्ती
सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको,
जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको,
सदियों का रत जगा मेरी रातों में आ गया,
मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया,
जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए,
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए,
गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर,
उड़ जाए दुपट्टा तो खनक औढ लिया कर,
तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं,
रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,
अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है।
~ क़तील शिफ़ाई

Hindi Poetry, Meri yaado ne

मेरी यादों ने

मेरी यादों ने तेरा शाना हिलाया होगा,
तुझको मेरी यादों ने ही यादों से जगाया होगा..

कौन उठाएगा तेरे नाज फुलों जैसे,
उसने ही मेरे लिये तुझको बनाया होगा..

पुरकैफ हवाऐं हैं, मौसम भी सुहाना है,
ऐसे में चले आओ, मिलने का जमाना है..

घर मेरे न आओगे मैं खुब समझता हूँ,
मेंहदी के लगाने का, सिर्फ एक बहाना है..

इन मस्त हवाओं में रंगीन फजाओं मे,
आ जाओ सनम तुमको, हमराज बनाना है..

मैखाने की बस्ती में क्यूँ आज चले आये?,
क्या हजरते वाईज को, कुछ पिना पिलाना है..

मैखाने में आये हैं ये सोच के हम साकी,
दुनिया में रफिक अपना, एक ये ही ठिकाना है।

– रफिक हुसैन

Hindi Poetry, Hamara Dil

हमारा दिल

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए
चराग़ों की तरह आँखें जलें, जब शाम हो जाए

मैं ख़ुद भी एहतियातन, उस गली से कम गुजरता हूँ
कोई मासूम क्यों मेरे लिए, बदनाम हो जाए

अजब हालात थे, यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर
मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाए

समन्दर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दो हमको
हवायें तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए

मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिंदा आस्माँ छूने में जब नाकाम हो जाए

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में, ज़िंदगी की शाम हो जाए

~ बशीर बद्र

Hindi Poetry, Chori kahi khule na

चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की,
ख़ुश-बू उड़ा के लाई है गेसू-ए-यार की,
अल्लाह रक्खे उस का सलामत ग़ुरूर-ए-हुस्न,
आँखों को जिस ने दी है सज़ा इंतिज़ार की,
गुलशन में देख कर मिरे मस्त-ए-शबाब को,
शरमाई जारी है जवानी बहार की,
ऐ मेरे दिल के चैन मिरे दिल की रौशनी,
आ और सुब्ह कर दे शब-ए-इंतिज़ार की,
जुरअत तो देखिएगा नसीम-ए-बहार की,
ये भी बलाएँ लेने लगी ज़ुल्फ़-ए-यार की,
ऐ ‘हश्र’ देखना तो ये है चौदहवीं का चाँद,
या आसमाँ के हाथ में तस्वीर यार की।

~ आग़ा हश्र काश्मीरी

Hindi Poetry, Sakht Dhoop me

सख्त़ धूप में

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया..

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया..

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया..

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया..

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया..

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया..

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल ‘फ़राज़’ तेरा हुनर हो गया।

~ फ़राज़

तराशा= Chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide,
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

Hindi Poetry, Machal ke jab bhi

मचल के जब

मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू,
सुना है आबशारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
खुदारा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को,
चरागों से मज़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है,
क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है,
तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी,
मगर हम खाकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है।

~ गुलज़ार

Hindi Poetry, Tut jajaye na bharam

टूट जाये ना

टूट जाये ना भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाली..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
दिल मे प्यार होता तो तेरे दर पे हाथ फैलाता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाती है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे।

~ Dev Patel

Hindi Poetry, Dil pe aaye huye

दिल पे

दिल पे आये हुए इलज़ाम पहचानते है,
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते है..

आईना-दार-ए-मोहब्बत हूँ कि अरबाब-ए-वफ़ा,
अपने ग़म को मेरे अंजाम से पहचानते है..

वादा हो शाम का कभी इक वजह-ए-मुलाक़ात सही,
हम तुझे गर्दिश-ए-अय्याम से पहचानते है..

पाँव फटे क्यूँ मेरी पलकों से सजाते हो इन्हे
ये सितारे तो मुझे शाम से पहचानते है।

~ देव पटेल

Hindi Poetry, Sahar ke khwab se

सहर के ख़्वाब से आँखें खुलीं जो रात मेरी,
कटी पतंग, नज़र आयी मुझको जात मेरी..

दुखों ने नन्हीं -सी जाँ को कुछ ऐसा घेरा है,
उलझ गई है मसाइब (आपत्ति) में काइनात मेरी..

वो मेरे हाले-ज़ुबों से भी प्यार करता है,
ठहर गई हैं मेरी खामेयाँ (अवगुण) सिफात (गुण) मेरी..

मेरा ही हाल न उसके बगैर बिगड़ेगा,
बहुत रुलाएँगी उसको भी बात-बात मेरी..

तलाशे-रिज़्क ने जमने दिये न पाँव कभी,
ख़ते – ग़ुबार बनी जा रही है जात मेरी..

नये दरख़्तों ने महफूज कर लिया है मुझे,
कि दास्तानें हैं तहरीर पात-पात मेरी..

ज़मीं पे रह के भी मेहदी (Name) मैं अर्श-पैमा हूँ,
बिसाते-वक़्त पे मुमकिन नहीं है मात मेरी।

– शौकत मेहदी

Hindi Poetry, Itna batla ke

इतना बतला

इतना बतला के मुझे हरजाई हूँ मैं यार कि तू,
मैं हर इक शख्स से रखता हूँ सरोकार के तू..

कम-सबाती मेरी हरदम है मुखातिब ब-हबाब,
देखें तो पहले हम उस बहर से हों पार के तू..

ना-तवानी मेरी गुलशन में ये ही बहसें है,
देखें ऐ निकहत-ए-गुल हम हैं सुबुक-बार के तू..

दोस्ती कर के जो दुश्मन हुआ तू जुरअत का,
बे-वफा वो है फिर ऐ शोख सितम-गार के तू।

– क़लंदर बख़्श ‘ज़ुरअत’

Hindi Poetry, Unse Door Rehne ka

उस ने दूर

उस ने दूर रहने का मशवरा भी लिखा है,
साथ ही मुहब्बत का वास्ता भी लिखा है,

उस ने ये भी लिखा है मेरे घर नहीं आना,
साफ़ साफ़ लफ़्ज़ों में रास्ता भी लिखा है,

कुछ हरूफ लिखे हैं ज़ब्त की नसीहत में,
कुछ हरूफ में उस ने हौसला भी लिखा है,

शुक्रिया भी लिखा है दिल से याद करने का,
दिल से दिल का है कितना फ़ासला भी लिखा है,

क्या उसे लिखें मोहसिन क्या उसे कहें मोहसिन,
जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है।

– मोहसिन नक़वी

Hindi Poetry, Jaagti Aankho hi se

जागती आँखों ही से सोती रहती हूँ,
मैं पलकों में खाव्ब पिरोती रहती हूँ..

तेजाबी बारिश के नक्श नहीं मिटते,
मैं अश्कों से आँगन धोती रहती हूँ..

मैं खुशबू की कद्र नहीं जब कर पाती,
फूलों से शर्मिंदा होती रहती हूँ..

जब से गहराई के खतरे भांप लिए,
बस साहिल पर पाँव भिगोती रहती हूँ ..

मैं भी नुसरत उसके लम्स की गर्मी से,
कतरा कतरा दरिया होती रहती हूँ

– नुसरत मेंहदी

Hindi Poetry, Khushiyan kam

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखो परेशान बहुत है..
करीब से देखा तो निकला रेत का घर,
मगर दूर से इसकी शान बहुत है..
कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं,
मगर आज झूठ की पहचान बहुत है..
मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूं तो कहने को इन्सान बहुत हैं।।

Hindi Poetry, Na koi dil me samaya

~ ना कोई दिल में ~
ना कोई दिल में समाया ना कोई पहलू में आया,
जा के भी पास रहीं तुम ही और
जान-ए-जाँ जान-ए-मन जानती हो
ना कोई दिल में …
क्यों तुमने दामन चुराया तुम जानों मैं क्या बताऊँ,
मुझमें ही कुछ ऐब होगा क्यों तुम पे तोहमत लगाऊँ,
मैं तो यहीं कहूँगा पूछोगी जब भी..
जा के भी पास ..
तुम जो मुझे दे गई हो इक ख़ूबसूरत निशानी,
लिपटा के सीने से उसको कट जाएगी ज़िन्दगानी,
मैं तो यहीं कहूँगा पूछोगी जब भी
जा के भी पास …

  • साहिर लुधियानवी

Hindi Poetry, Mujhe nisbat hai

मुझे निस्बत हैं तुमसे या शायद मुहब्बत है,
मगर तुम मेरी जरूरत हो ये जरूरी तो नहीं..

चाहता हूं मैं तुम्हें शायद हर शय से ज्यादा,
मगर एक तुम ही चाहत हो ये जरूरी तो नहीं..

जो हैं हमारे दरमियां हां! वो हम दोनों का हैं,
ये सिर्फ मेरी ही अमानत हो ये जरूरी तो नहीं..

कुछ पहलु अनजान रहें कुछ जानने का अरमान रहें,
सब राज़ खोलु ये कुर्बत हो ये जरूरी तो नहीं..

जब चल पड़ें हो साथ तो कुछ दूरियां तय करें,
मुकाम मिले ये किस्मत हो ये जरूरी तो नहीं।।

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