Mujhko Ckhu ke pighal rahe ho tum, Poetry

मुझको छूके
मुझको छूके पिघल रहे हो तुम ,
मेरे हमराह जल रहे हो तुम।
चाँदनी छन रही है बादल से ,
जैसे कपड़े बदल रहे हो तुम।
पायलें बज रही हैं रह रह कर ,
ये हवा है कि चल रहे हो तुम।
नींद भी टूटने से डरती है ,
मेरे ख़्वाबों में ढल रहे हो तुम। 💏