Hindi Poetry, Tut jajaye na bharam

टूट जाये ना

टूट जाये ना भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाली..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
दिल मे प्यार होता तो तेरे दर पे हाथ फैलाता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाती है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे।

~ Dev Patel

Hindi Poetry, Tut jajaye na bharam