Hindi Poems Poetry (New Shayari)

Hindi Poems Poetry


Hindi Shayari Poem, Mehnat se utha hoon

Mehnat se utha hoon, mehnat ka dard jaanta hoon,
aashma se jyada, zami ki kdra jaanta hoon,

Lacheela ped tha jo jhel gaya aandhiya,
main magroor darakhton ka hashra jaanta hoon,

Chote se bada banana aashan nahi hota,
zindagi mein kitna zaroori hai sabra jaanta hoon,

Mehnat badhi to kishmat bhi badh chali,
chhalon me chipee lakeeron ka asar jaanata hoon,

Bewaqt, be wajah, be hisab mushkura deta hoon,
aadhe dushmano ko to yun hi hara deta hoon,

Kafi kuch paaya par apna kuch nahi maana,
Kyunki ek din raakh main milna hai me ye jaanta hoon!

मेहनत से उठा हूँ, मेहनत का दर्द जानता हूँ,
आसमाँ से ज्यादा जमीं की कद्र जानता हूँ।

लचीला पेड़ था जो झेल गया आँधिया,
मैं मगरूर दरख्तों का हश्र जानता हूँ।

छोटे से बडा बनना आसाँ नहीं होता,
जिन्दगी में कितना जरुरी है सब्र जानता हूँ।

मेहनत बढ़ी तो किस्मत भी बढ़ चली,
छालों में छिपी लकीरों का असर जानता हूँ।

बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ,
आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ!!

काफी कुछ पाया पर अपना कुछ नहीं माना,
क्योंकि एक दिन राख में मिलना है ये जानता हूँ।

Dosti Shayari, Haan thodha thak gaya hu

सभी मित्रों को समर्पित

हाँ थोड़ा थक गया हूँ दूर निकलना छोड दिया,
पर ऐसा नही की मैंने चलना छोड़ दिया।

फासले अक्सर रिश्तो में दूरी बढ़ा देते है,
पर ये नही की मैंने दोस्तों से मिलना छोड दिया।

हां जरा अकेला हूँ दुनिया की भीड मे,
पर ऐसा नही है कि मैंने दोस्ताना छोड दिया।

याद तुम्हें करता हूं दोस्तों और परवाह भी,
बस कितनी करता हूं ये बताना छोड़ दिया।। 👬

Poem, Ek Kavita har rishte ke liye

ये सुन्दर कविता.. हर रिश्ते के लिए

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए
फिर मनाएगा कौन!

आज दरार है, कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन!

मैं चुप, तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन!

बात छोटी को लगा लोगे दिल से,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन!

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन!

न मैं राजी, न तुम राजी,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन!

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन!

एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन!

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन!

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें..
तो कल इस बात पर फिर पछतायेगा कौन!!

Hindi Poem, Jhank rahe hain sab

झाँक रहे है इधर उधर सब।
अपने अंदर झांकें कौन?

ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां।
अपने मन में ताके कौन?

सबके भीतर दर्द छुपा है।
उसको अब ललकारे कौन?

दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते।
खुद को आज सुधारे कौन?

पर उपदेश कुशल बहुतेरे।
खुद पर आज विचारे कौन?

हम सुधरें तो जग सुधरेगा
यह सीधी बात उतारे कौन?

Hindi Shayari Poem, Pehli Nazar me

पेहली नज़र में भी प्यार होता है
दिल का चैन अक्सर यूँ ही खोता है
अनजानी आँखे जब किसी पे रुक जाती है
अक्सर दिल के अंदर वोह झाँक जाती है
धड़कने यूँ ही दिल की बढ़ जाती है
भीड़ में भी तब किसी की याद सताती है
चैन दिल का खो जाता है
बस एक वही चेहरा याद आता है
दिल का एक अनकहा रिश्ता दिल से जुड़ जाता है
पेहली नज़र में जब प्यार हो जाता है
एक पल मे अजनबी दिल का मलिक बन जाता है
आँखे बस वोह अजनबी आँखे ढूंढ़ती है
पिया से मिलने का बस वोह बहना ढूंढ़ती है
जिया को सुकून तब आता है
जब आँखो के सामने उनका चेहरा आता है
दिल से दिल का बस एक रिश्ता जुड़ जाता है

Hindi Shayari, Ek gajal maa ke naam

पहली बार किसी गज़ल को पढ़कर आंसू आ गए ।

शख्सियत, ए ‘लख्ते-जिगर’, कहला न सका ।
जन्नत.. के धनी पैर.. कभी सहला न सका ।

दुध, पिलाया उसने छाती से निचोड़कर,
मैं ‘निकम्मा’, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।

बुढापे का सहारा.. हूँ ‘अहसास’ दिला न सका
पेट पर सुलाने वाली को ‘मखमल, पर सुला न सका ।

वो ‘भूखी’, सो गई ‘बहू’, के ‘डर’, से एकबार मांगकर,
मैं सुकुन.. के ‘दो, निवाले उसे खिला न सका ।

नजरें उन बुढी, आंखों.. से कभी मिला न सका ।
वो दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।

जो हर रोज ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,
उसे दीवाली पर दो जोड़, कपडे सिला न सका ।

बिमार बिस्तर से उसे शिफा, दिला न सका ।
खर्च के डर से उसे बडे़ अस्पताल, ले जा न सका ।

माँ के बेटा कहकर दम, तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,
दवाई, इतनी भी महंगी.. न थी के मैं ला ना सका ।

Thanks Love you Mom

Hindi Poem, Meri mohabbat

मेरी मोहब्बत

उस पर ही बरसेंगी.. जो मेरा दिल जीतेगी …!!
अपने अभिमान से ज्यादा अपनों को सम्मान देगी। ।!!

हर हाल में साथ और दुविधा में भी होसला बढ़ा देगी। .!!
मेरी गलती पर नाराज़ होगी फिर गुस्से में मुस्करा देगी !!

मेरी मोहब्बत उस पर ही बरसेंगी.. जो मेरा दिल जीतेगी ..!!
ना आंधी ना बरसात में काम होगा। मेरा जो विश्वास उस पर होगा। .!!

नादान भले होगी वो पर अपनी बाते मुझे समझा देगी।!!
समझेगी मेरे हालात को और फिर उसमे जो मेरा साथ देगी।!!

उदास होगी और फिर हस्ते हुए मुझे भी रूला देगी।!
कुछ ऐसी होगी वो जो मेरा जीवन भर साथ देगी।!

मेरे दिलो दिमाग में जो रहेगी और मेरी ज़िन्दगी में जो खुराफात करेगी ।!!
दोस्तों ऐसी होगी तुम्हारी भाभी जो तुमको कभी भैया तो कभी देवर कहेगी। ।!!

ऐसी होगी मेरा दिल जीतेगी और जिसपे, मेरी मोहब्बत बरसेगी।!!

Barish Shayari, Mosam hai barish ka

मौसम है बारिश का और याद तुम्हारी आती है,
बारिश के हर कतरे से आवाज़ तुम्हारी आती है,
बादल जब गरजते हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है,
दिल की हर इक धड़कन से आवाज़ तुम्हारी आती है,
जब तेज हवायें चलती हैं तो जान हमारी जाती है,
मौसम है कातिल बारिश का और याद तुम्हारी आती है|

Mausam Hai Barish Ka Aur Yaad Tumhari Aati Hai,
Barish Ke Har Qatre Se Awaz Tumhari Aati Hai.
Badal Jab Garajte Hain, Dil Ki Dharkan Badh Jati Hai,
Dil Ki Har Ek Dharkan Se Awaz Tumhari Aati Hai.
Jab Tez Hawayein Chalti Hai To Jaan Hamari Jati Hai,
Mausam Hai Barish Ka Aur Yaad Tumhari Aati Hai.

Ye Baarisho’n K Mausam
Bas Tum Hi Se Hyn Wabasta
K Mohabbato’n Main Baarish
Bari Lazmi Si Shey Hy
Chahey Aasman Se Barsey
Chahey Chashm-e-Nam Se

Barish Ka Ye Mousam Koch Yaad Dilata Hai,
Kisi Kay Saath Honay Ka Ehsaas Dilata Hai,

Fiza Bhi Sard Hai Yaadain Bhi Taaza Hai,
Ye Mousam Kisi Ka Pyaar Dil May Jagata Hai,

Bheegi Hoye Raatain Khamosh Si Baatain,
Aisay Main Koch Kaho Tu Her Lafz Madhem Ho Jata Hai,

Barsat Ki Hain Bondain, Bondon May Hai Khushbo,
Ye Lumha Tu Dil Ka Ehsaas Chuu Jata Hai,

Aisay Main Tum Bhi Keh Do Dil Ki Baat,
Ye Mousam Tu Pal Bhar Main Beet Jata Ha.

Beti Shayari Poem, Betiyaan

बोये जाते हैं बेटे.. पर उग जाती हैं बेटियाँ,
खाद पानी बेटों को.. पर लहराती हैं बेटियां,
स्कूल जाते हैं बेटे.. पर पढ़ जाती हैं बेटियां,
मेहनत करते हैं बेटे.. पर अव्वल आती हैं बेटियां,
रुलाते हैं जब खूब बेटे.. तब हंसाती हैं बेटियां,
नाम करें न करें बेटे.. पर नाम कमाती हैं बेटियां,
जब दर्द देते बेटे.. तब मरहम लगाती बेटियां,
छोड़ जाते हैं जब बेटे.. तो काम आती हैं बेटियां,
आशा रहती है बेटों से.. पर पुर्ण करती हैं बेटियां,
हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे.. पर समय की नज़ाकत को समझती बेटियां,
बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूर कर देखे…
किंतु.. बेटी को सूरज जैसा बनाओ ताकि घूरने से पहले सब की नजर झुक जाये.

Rain Barish Poem, Dharti se sawan ki bundein

Dharti se sawan ki bundein milne jab bhi aati hain,
Uski shikayat karti hain kuchh apna dard sunati hain.
Kuchh rishte naye banati ehsaas naya de jati hain,
Har ek kali ko phool baag ko gulshan kar jati hain.
Chahat nayi si hoti hai armaan naya de jati hain,
Kuchh khushi ke pal kuchh muskan nayi de jati hain.

Dharti se sawan ki bundein milne jab bhi aati hain,
Uski shikayat karti hain kuchh apna dard sunati hain.
Sukhe kheton se jab saundhi si khushboo aati hai,
Suni aankhon mein phir se ek khwab naya de jati hai.
Kahin pyar naya hota hai kahin judaai de jati hai,
Kahin sawan ke jhoole kahin birha ke geet sunati hai.

Dharti se sawan ki bundein milne jab bhi aati hain,
Uski shikayat karti hain kuchh apna dard sunati hain.