Dard Shayari, Dard Kya hota hai

दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़ ,
कमाल की ग़ज़ल तुम को सुनायेंगे किसी रोज़।
थी उन की ज़िद के मैं जाऊँ उन को मनाने,
मुझ को ये वहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़ ।
उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में,
तुम्हारे होंगे अगर, तो लौट आएंगे किसी रोज़।
– परवीन शाक़िर