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2 Line Shayari, Manzile hamare kareeb se

मंज़िले हमारे करीब से गुज़रती गयी जनाब,
और हम औरो को रास्ता दिखाने में ही रह गये।


सारे सितारे फ़लक से ज़मीं पर जब उतर कें आयेंगे,
फिर हम तेरी यादों के साथ रात भर दिवाली मनायेंगे।


रब्ब जाने क्या कशिश है इस मोहब्बत में..
इक अंजान, हमारा हकदार बन बैठा।


कैसी मुहब्बत हैं तेरी महफ़िल मे मिले तो,
अन्जान कह दिया, तनहा ज़ो मिले तो जान कह दिया।


लफ़्ज़ों में बातें बयां कर पाते तो कब का,
कर देते.. मगर बयां करना नही आता हमे।


दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो,
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।


मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं,
याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।


कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये,
तेरी एक झलक ही काफी है मेरे ठीक हो जाने के लिये।


अपने दिल से कह दो किसी और से मोहब्बत की ना सोचे,
एक मैं ही काफी हूँ सारी उम्र तुम्हे चाहने के लिए।


उसे न चाहने की आदत, उसे चाहने का जरिया बन गया,
सख्त था मैं लड़का, अब प्यार का दरिया बन गया।

Funny Shayari, Manzil unhi ko milti hai

Manzil unhi ko milti hai,
jinke hoslo me jaan hoti hai,
aur band bhatti me bhi daaru unhi ko milti hai..
jinki bhatti me pehchaan hoi hai.

मंजिल उन्हीं को मिलती है,
जिनके हौसलों में जान होती है…
और और बंद भट्ठी में भी दारू उन्हीं को मिलती है,
जिनकी भट्ठी में पहचान होती है!

2 Line Shayari, Manzilon se Gumrah

मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता.


दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी।


कौन कहता है मुसाफिर जख्मी नही होते
रास्ते गवाह हैं कम्बख्त गवाही नही देते।


अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो ।


इक रात चाँदनी मिरे बिस्तर पे आई थी
मैं ने तराश कर तिरा चेहरा बना दिया ।


न तो देर है, न अंधेर है .. रे मानव!
तेरे कर्मों का सब फेर है .. शुभ रात्रि।


सुख भोर के टिमटिमाते हुए तारे की तरह है
देखते ही देखते ये ख़त्म हो जाता है …!


जब भी अंधेरा गहराता है…
उजाला उसका समाधान बनकर आ जाता है…!


एक ही समानता है…पतंग औऱ जिन्दगी में
ऊँचाई में हो तब तक ही ‘वाह – वाह’ होती है ।


Kuch door tak to jaise koi mere sath tha
Phir… apne sath aap hi chalna paDa mujhe!

Maut Shayari, Zindagi ke safar ki manzil

Zindagi ke safar ki manzil hai maut,
Milti hai zindagi toh aati hain maut,
Hasna hai zindagi toh rona hain maut,
Chalna h zindagi to rukna hain maut,
Har aashiq ki zindagi ki manzil hain maut.

Meri Manzil Ka Koi Bhi Thikana Nahi, Shayari

Meri Manzil Ka Koi Bhi Thikana Nahi,
Musafir Ki Tarah Jeena Hai Mujhko,

Koi Kuchh Nahi Kar Sakta Mere Liye,
Bas Judayi Ka Jahar Peena Hai Mujhko.

Her Raah Ek Nayi Manzill Hai, Shayari

Her Raah Ek Nayi Manzill Hai,
Kaddmo Ko Shambhalna Zara Musqil Hai,

Dost Ager Saath Naa Dey Toh,
Dhoop Toh Kyaa Chhaanv Mein Bhee Challna Musqil Hai.

Murradon ki manzil ke sapno main khoye, Shayari

Murradon ki manzil ke sapno main khoye,
Mohabbat ki raho pe hum chal pade the.
Zara dur chal ke jab aankh khuli to,
Kadi dhoop mein hum akele khade the.

Manzil nahi hai thikana nahi hai, Shayari

Manzil nahi hai thikana nahi hai,
Kahi par bhi mera ashiyana nahi hai,
Maine teer chalana sikhaya ushe,
Ab mere siva uska koi nishana nahi hai.

Kuch Umar Ki Pehli Manzil Thi, Shayari

Kuch Umar Ki Pehli Manzil Thi,
Kuch Raaste The Anjaan Bahut..!
Kuch Hum Bhi Pagal The Lekin,
Kuch Woh Bhi The Nadan Bahut..!
Kuch usne Bhi Na Samjaya,
Yeh Pyar Nahi Asaan Bahut..!
Akhir Humne Bhi Khel Liya,
Jis Khel Mein Tha Nuqsaan Bahut…!!

Talash Hai Us Manzil Ki, Shayari

Talash Hai Us Manzil Ki,
Jise Main Pana Nahi Chahti,
Dekh Raha Hai Wo Mujhe,
Par Mai Uski Nazron Mai Aana Nahi Chahati….