Love Shayari, Ghar se bahar

घर से बाहर वो नक़ाब मे निकली,
सारी गली उनकी फिराक मे निकली,
इनकार करते थे वो हमारी मोहब्बत से,
ओर हमारी ही तस्वीर उनकी किताब से निकली।

Ghar se bahar wo naqab me nikli,
Sari gali uske firaq me nikli,
Inkar karti thi wo hamari mohabbat se..
Aur hamari hi tasveer uske kitab se nikli..!!

Hindi Shayari, Aapne ghar ki izaat sab ko

अपने घर की इज्ज़त सब को प्यारी लगती है
गैरों की बहन बेटी क्यों अबला नारी लगती है,

दुसरो की बहन बेटी को छेड़ने में बड़ा मजा आता है
खुद की बहन बेटी को कोई देखे तो मिर्ची क्यों लगती है,

अपनी गर्ल फ्रेंड की हर बात बड़ी अच्छी लगती है
बहन का बॉय फ्रेंड बने तो क्यों दिल में आग लगती है,

किसी का बलात्कार हो जाये खबर गरम लगती है
खुद के साथ यही बीते तो क्यों फिर शर्म लगती है,

मुझ को तो हर बहन बेटी अपनी सी लगती है
बस घर को चलाने वाली लक्ष्मी सी लगती है,

इज्ज़त हर घर की एक जैसी ही होती है
बहन बेटी सब की बड़ी प्यारी सी होती है।

True Shayari, Na sangharsh na takleef

ना संघर्ष न तकलीफ
तो क्या मज़ा है जीने में
बड़े बड़े तूफ़ान थम जाते हैं
जब आग लगी हो सीने में..

Na sangharsh na takleef
To kya maza hai jene mein
Bade bade toofan tham jate hai
Jab aag lagi ho seene mein..

Hindi Shayari, Ghar aao to sahi

कोई वादा खुद से, निभाओ तो सही..
कभी खुद से खुद को, मिलवाओ तो सही..

तल्खियां लेकर, रोज लोटते हो..
कभी मुस्कुराहटें भी घर, लाओ तो सही..

रौनके भी होगी, महफिलें भी सजेगी..
कभी अपने आशियाने को, सजाओ तो सही..

खिल उठेगी, दिल की हर दर ओ दीवार..
कभी च़राग सा खुद को, जलाओ तो सही..

फांसले भी घटेंगे, नजदीकियां भी बढेगी..
कभी एक कदम ईमानदारी का, बढाओ तो सही..

खुशियां इतनी मिलेगी, दामन छोटा लगेगा..
कभी अपनो के आगे, झोली फैलाओ तो सही..

बहता हुआ मिलेगा, प्यार का समंदर..
कभी प्यासे रहकर…घर आओ तो सही..

Hindi Shayari, Sangharsh mein aadmi

संघर्ष में आदमी अकेला होता है
सफलता में दुनिया उसके साथ होती है
जब-जब जग किसी पर हँसा है
तब-तब उसी ने इतिहास रचा है